बिहार में 450 से अधिक बीएलओ निलंबित, पर आत्महत्या का कोई मामला नहीं चुनाव आयोग के अधिकारियों ने किए दावे, फेज-2 की रफ्तार पहले से सुचारू
नई दिल्ली/पटना। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बीएलओ की मौतों और कथित आत्महत्याओं को काम के दबाव से जोड़कर उठ रही आशंकाओं के बीच चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बिहार में पहले चरण के दौरान 450 से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर्स को लापरवाही के कारण निलंबित तो किया गया, लेकिन एक भी आत्महत्या का मामला सामने नहीं आया।
फेज-1 बनाम फेज-2: रफ्तार में बड़ा अंतर
अधिकारियों ने बताया कि फेज-1 केवल बिहार में आयोजित हुआ था और एन्यूमरेशन फॉर्म वितरण का कार्य मात्र 4 दिनों में पूरा करना पड़ा। इसके विपरीत, फेज-2 में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यही प्रक्रिया 10 दिनों तक चली, जिसके कारण काम का दबाव अपेक्षाकृत कम रहा।
पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों में मौतों की जांच जारी
पश्चिम बंगाल में कथित आत्महत्या के मामलों ने चिंता बढ़...









